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Thursday, June 4, 2015

विश्‍व की सबसे सस्‍ती बुलेट ट्रेन भारत में चलेगी


मुंबई: विश्व की सबसे सस्ती भारत में मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली पहली बुलेट ट्रेन हो सकती है।  भारत की इस पहली बुलेट ट्रेन का किराया फर्स्ट एसी से कुछ ही महंगा होगा। जानकारी
के मुताबिक मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली ट्रेन में एसी फर्स्ट का किराया1895 रुपये है। वहीं बुलेट ट्रेन में इसका अनुमानित किराया 2800 रुपये होगा। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जापान की टीम इस बारे में सर्वे कर रही है कि 320 किमी की स्पीड से चलने वाली बुलेट ट्रेन के यात्री कितना किराया दे सकते हैं। इसकी रिपोर्ट अगले माह तक रेल मंत्रालय को सौंप दी जाएगी। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2023 में जब तक मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलना शुरू होगी उस वक्त तक इस रूट पर यात्रा करने वालों की संख्या करीब 40000 तक पहुंच जाएगी। इस कोरिडोर में करीब दस स्टेशन होंगे। इस रूट पर करीब 98 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा मुंबई-अहमदाबाद के बीच की 534 किमी की दूरी मौजूदा ट्रेनेें करीब आठ घंटे में पूरा करती हैं। जापान में चलने वाली टोहको शिंकांसेन 713 किमी की दूरी के लिए आठ हजार रुपये वसूलती है।


Wednesday, June 3, 2015

काला धन रखने वाले कुछ और नामों को सार्वजनिक किया स्विटजरलैंड ने

बर्न।  मंगलवार को प्रकाशित सरकारी राजपत्र में भारत के सैयद मोहम्मद मसूद और चांद कौसर मोहम्मद का भी नाम शामिल है। भारत को उसने दोनों के नाम पहले ही बता दिए थे, लेकिन ताजा अधिसूचना में फिर से उनके नाम प्रकाशित किए गए हैं। अधिसूचना में बहामास की इकाई वार्फ लिमिटेड से मसूद का गठजोड़ बताया गया है। इसकी एक पोंजी स्कीम घोटाले में पहले से ही जांच चल रही है। 

इसके कुछ खातों को प्रवर्तन निदेशालय के आग्रह के बाद पहले ही सीज कि या जा चुका है। अन्य नामों का खुलासा का भी खुलासा हुआ है। इनमें पनामा, जर्मनी और अमेरिका के लोग शामिल हैं। अब तक कुल सात भारतीयों के नामों का खुलासा हो चुका है। ताजा प्रकाशित अधिसूचना में पांच विदेशी संस्थाओं के भी नाम सार्वजनिक किए गए हैं। ये वो संस्थाएं हैं जिसकी जानकारी भारत ने पहले ही मांगी थी। इन संस्थाओं को टैक्स चोरी करने में माहिर माना जाता है और भारत इन संस्थाओं की सभी गतिविधियों पर करीने से नजर रखकर जांच भी कर रहा है।


Monday, June 1, 2015

Saturday, May 30, 2015

भारत में पड़ सकता है सूखा


नई दिल्ली। एक्यूवेदर नामक एजेंसी का आंकलन है कि प्रशांत महासागर में बन रही परिस्थितियों के चलते इस बार मानसून कमजोर रहेगा।  भीषण गर्मी के बीच एक  एजेंसी ने भारत में भीषण सूखा पड़ने की आशंका जताई है।
 इसका असर न केवल भारत बल्कि पाकिस्तान पर भी पड़ेगा।
भारत में मौसम विभाग ने मानसून के वक्त पर आने और सामान्य रहने का अनुमान लगाया है, लेकिन अलनिनो की भी आशंका जताई गई है। अब अमेरिकी एजेंसी की इस भविष्यवाणी से भारत में चिंता बढ़ गई है।
एजेंसी के प्रवक्ता के मुताबिक, अलनिनो पर भारतीय मौसम विभाग की आशंका बिल्कुल सही है, लेकिन उन्होंने हालात को कमजोर करके लोगों के सामने रखा है, ताकि किसी तरह ही हड़बड़ाहट पैदा नहीं हो।
ऐक्यूवेदर के मुताबिक अकाल की यह स्थिति एल नीनो प्रभाव की वजह से पैदा होगी। समुद्रतल का तापमान बढ़ता-घटता रहता है। तापमान के बढ़ने की स्थिति एल नीनो कहलाती है। इसकी वजह से औसत से ज्यादा चक्रवातीय तूफान आते हैं।

वैसे, एल नीनो के बारे में इसी तरह की बात भारतीय मौसम विभाग भी कह चुका है। लेकिन, भारतीय अधिकारियों ने पूर्वानुमान देते हुए संयमित रवैया अपनाया था ताकि किसी तरह की घबराहट की स्थिति पैदा न हो।

 उन्होंने कहा,हमने जरूरी सूचनाएं संबंधित मंत्रालयों के साथ साझा कर दी हैं। सरकार जरूरी उपायों पर काम कर रही है।' उन्होंने कहा कि जब पिछले साल 12 फीसदी कम बारिश हुई थी तो हालात को संभाल लिया गया था, तब इस साल भी ऐसा किया जा सकता है।

भारत में पड़ सकता है सूखा

नई दिल्ली। एक्यूवेदर नामक एजेंसी का आंकलन है कि प्रशांत महासागर में बन रही परिस्थितियों के चलते इस बार मानसून कमजोर रहेगा।  भीषण गर्मी के बीच एक  एजेंसी ने भारत में भीषण सूखा पड़ने की आशंका जताई है।

इसका असर न केवल भारत बल्कि पाकिस्तान पर भी पड़ेगा।
भारत में मौसम विभाग ने मानसून के वक्त पर आने और सामान्य रहने का अनुमान लगाया है, लेकिन अलनिनो की भी आशंका जताई गई है। अब अमेरिकी एजेंसी की इस भविष्यवाणी से भारत में चिंता बढ़ गई है।

एजेंसी के प्रवक्ता के मुताबिक, अलनिनो पर भारतीय मौसम विभाग की आशंका बिल्कुल सही है, लेकिन उन्होंने हालात को कमजोर करके लोगों के सामने रखा है, ताकि किसी तरह ही हड़बड़ाहट पैदा नहीं हो।

ऐक्यूवेदर के मुताबिक अकाल की यह स्थिति एल नीनो प्रभाव की वजह से पैदा होगी। समुद्रतल का तापमान बढ़ता-घटता रहता है। तापमान के बढ़ने की स्थिति एल नीनो कहलाती है। इसकी वजह से औसत से ज्यादा चक्रवातीय तूफान आते हैं।

वैसे, एल नीनो के बारे में इसी तरह की बात भारतीय मौसम विभाग भी कह चुका है। लेकिन, भारतीय अधिकारियों ने पूर्वानुमान देते हुए संयमित रवैया अपनाया था ताकि किसी तरह की घबराहट की स्थिति पैदा न हो।

 उन्होंने कहा,हमने जरूरी सूचनाएं संबंधित मंत्रालयों के साथ साझा कर दी हैं। सरकार जरूरी उपायों पर काम कर रही है।' उन्होंने कहा कि जब पिछले साल 12 फीसदी कम बारिश हुई थी तो हालात को संभाल लिया गया था, तब इस साल भी ऐसा किया जा सकता है।