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Sunday, May 24, 2015

अफजल गुरू को राजनीतिक कारणों से दी गयी फांसी : उमर अब्दुल्ला

9:21:00 PM Posted by Unknown , , ,
नयी दिल्ली :  अफजल गुरु को राजनीतिक कारणों से फांसी दी गयी हैं और इस निर्णय के बारे में मुझे कुछ ही घंटे पहले जानकारी दी गयी थी. उक्त बातेंजम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज कही.  उन्होंने बताया कि उमर अपनी बहन के साथ दिल्ली के एक रेस्तरां में रात का भोजन कर रहे थे और उसी दौरान तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का फोन आया कि
उन्होंने गुरु के कागजात पर हस्ताक्षर कर दिया है और अगली सुबह उसे फांसी दी जायेगी तथा ऐसे में वह जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था बनाये रखने का इंतजाम करें. उस समय उमर मुख्यमंत्री थे.


उमर ने कहा, मैंने उस वक्त गृह मंत्री से पूछा कि क्या वह पूरी तरह निश्चित हैं कि अब कुछ नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि नहीं क्योंकि वह कागजात पर हस्ताक्षर कर चुके हैं और वारंट जारी किया जा चुका है तथा मुझे इसके बाद के प्रभावों से निपटने के लिए कहा.  उन्होंने यह संकेत करते हुए कि राजीव गांधी और बेअंत सिंह के हत्यारों के मामलों को अलग -अलग ढंग से निपटाया गया , कहा, सच यह है ,चाहें हम इसे पसंद करंे या नहीं ,कि उसे राजनीतिक कारणों से फांसी दी गयी.

उन्होंने कहा, मैंने कहा था कि मैं तब तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा जब तक यह नहीं देख लेता कि सरकार ने दूसरे मामलों को कैसे निपटाया.....मैंने दूसरे मामलों को देखा. देखिए कि उन्होंने बेअंत सिंह और राजीव गांधी के हत्यारों के मामलों को कैसे निपटाया और किस तरह इस व्यक्ति को बिना बारी के फांसी दे दी.  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, स्पष्ट रूप से आप इसके अलावा दूसरा निष्कर्ष क्या निकाल सकते हैं कि वे भाजपा के हाथों अपनी हार से बचना चाहते थे और इसलिए दो लोगों को फांसी दिया जाना सबसे आसान था. पहला अजमल कसाब को फांसी दी क्योंकि वह विदेशी नागरिक था और दूसरा अफजल गुरु था. चाहे मैं इसे पसंद करूं या नहीं लेकिन उन्होंने ऐसा किया.. सौजन्यः प्रभात खबर



राहुल गांधी के रुख में आया 'अद्भुत परिवर्तन' : उमर अब्दुल्ला

नयी दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि राहुल गांधी ने संप्रग सरकार के समय चुप रहना पसंद किया क्योंकि उनके बोलने को प्रधानमंत्री अथवा उनकी मां की आलोचना के तौर पर मान लिया गया होता. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष के रुख में 'अद्भुत परिवर्तन' देखने को मिला है.

राहुल गांधी की ओर से मोदी सरकार पर आक्र्रामक अंदाज में हमला करने के संदर्भ में उमर ने कहा, ' जो राहुल यहां से गए थे, लौटने के बाद वो राहुल नहीं रहे.' उन्होंने कहा,' यह अद्भुत परिवर्तन है. मैं नहीं जानता कि इसकी क्या वजह है. मुझे उनसे मिलने का मौका नहीं मिला क्योंकि वह बहुत व्यस्त हैं लेकिन मैं नहीं जानता कि वह कहां गए थे और क्या किया...'     

उमर ने कहा,' यह परिवर्तन किस वजह से आया है, मैं जानने और सीखने की कोशिश करुंगा क्योंकि मेरा मानना है कि इसमें मेरे लिए भी सीखने के सबक हैं. मैं सिर्फ इतनी उम्मीद करता हूं कि इसका मतलब यह नहीं हो कि मुझे भी 56 दिनों के लिए गायब होना पडे. परंतु यह अच्छा है. उनको सलाम.'

उन्होंने कहा,' पहले उनकी ओर से अपना विचार रखने का मतलब यह निकाला जाता कि वह प्रधानमंत्री की आलोचना कर रहे हैं अथवा अपनी मां की आलोचना कर रहे हैं. यह कभी भी आसान नहीं था. और ऐसे में मुझे लगता है कि उस वक्त उन्होंने चुप रहने का विकल्प चुना तथा इससे यह धारणा बढती चली गई कि वह बोल नहीं सकते और यह नहीं जानते कि वह क्या बोलना चाहते हैं.'

उमर ने कहा कि राहुल को बहुत कुछ कहना था लेकिन वह कहने की स्थिति में नहीं थे, जो कि विपक्ष में होने का फायदा होता है जहां अपना विचार रखा जाता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि राहुल अगले आम चुनाव तक अपनी यह गति बरकरार रखने में सफल रहेंगे.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा,' लोग यही सवाल पूछ रहे हैं और मुझे पूरा भरोसा है कि वह उन लोगों को गलत साबित करेंगे अगर वह इसे बरकरार रखते हैं.' उन्होंने कहा, ' मुझे लगता है कि जितना मैं उन्हें जानता हूं, अब उन्होंने अपना दिमाग बना लिया है और यह अगले आम चुनाव तक रहेगा.' सौजन्यः प्रभात खबर